स्मार्ट वर्क और कड़ी मेहनत को लेकर ब्लॉगिंग में 3 भ्रम

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आप इस विषय में बहुत जानकारी रखते हैं। सभी कहते हैं स्मार्ट वर्क से कम समय में बहुत बढ़िया काम हो जाता है। अच्छे काम का नतीजा हमेशा ही अच्छा होता है। लेकिन स्मार्ट वर्क को लेकर बहुत से नये-पुराने ब्लॉगर भ्रमित रहते हैं।

क्या कोई ब्लॉगर पहले दिन से ही स्मार्ट वर्क कर सकता है?

स्मार्ट वर्क के बारे में यह पहला भ्रम होता है। कैसे कोई व्यक्ति पहले ही दिन से एक दम बढ़िया काम कर सकता है? क्या उसे अच्छे नतीजे पहले ही दिन से नज़र आने लगते हैं? वो कितना भी अपने काम में पक्का क्यों न हो? उसमें कितने ही गुण क्यों न हो? लेकिन बिना अनुभव के कोई भी व्यक्ति किसी भी नये क्षेत्र में अपना झण्डा नहीं फहरा सकता है। शुरुआती दिनों में किसी चमत्कार के पीछे कड़ी मेहनत ही होती है, इतना तो हम सभी जानते हैं। इसलिए नये ब्लॉगर को अगर आपको कोई स्मार्ट वर्क के जादुई सपने दिखाये तो उसकी बातों को नज़र अंदाज़ कर देना चाहिए।

क्या ये कड़ी मेहनत है, स्मार्ट वर्क नहीं?

दूसरा भ्रम स्मार्ट वर्क और कड़ी मेहनत करने के बारे में होता है। इस पर बहुत वाद-विवाद होता है। वे कौन लोग थे जिन्हें अब तक सफलता प्राप्त हुई है? क्या उन्होंने कड़ी मेहनत की थी? इसके बारे में कोई शक नहीं होना चाहिए। तब कैसे उन्होंने इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त की? क्या उन्हें आज के सलाहकारों से कम आता था जो कि आज किसी भी बात पर स्मार्ट वर्क करने की सलाह देते हैं? इससे हम कह सकते हैं कि कड़ी मेहनत ही स्मार्ट वर्क है। अब तो आप समझ गये होंगे!

Smart work in blogging

अगर स्मार्ट वर्क और कड़ी मेहनत का अर्थ एक है तो क्यों सलाहकार इसके अलग-अलग अर्थ बताते हैं?

दोनों शब्दों के अर्थ भिन्न नहीं हैं। इनके बारे में हमारा नज़रिया अलग-अलग है। आज के कुछ मार्केटर अपने डिजिटल प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए स्मार्ट वर्क शब्द का प्रयोग करते हैं। क्या किसी ने उनसे पूछा है कि उन्हें इतनी सफलता कैसे मिली है? इसके लिए उन्होंने इसके लिए स्मार्ट वर्क किया था या फिर कड़ी मेहनत की थी। एक बात पर विचार करना ज़रूरी है कि फिर वो ये क्यों कहते हैं कि हमने एक लम्बे समय तक संघर्ष किया है। अगर इतना सब करके वो स्मार्ट वर्क क्या है इस बात को समझ पाये हैं तो वो दूसरों से कैसे अपेक्षा करते हैं कि वे उनकी सलाह से ही स्मार्ट वर्क कर पायेंगे। सभी में अलग-अलग गुण और योग्यताएँ होती हैं। हर व्यक्ति स्मार्ट वर्क और कड़ी मेहनत को अपने अनुसार करता है। तब हम ऐसा क्यों सोचते हैं कि किसी एक के काम करने का ढंग दूसरे व्यक्ति को भी ठीक वैसी ही सफलता दिलाएगा? यही रहस्य है कि वे शब्दों के साथ खिलवाड़ करते हैं। अन्यथा जो कड़ी मेहनत कर रहा है कि वास्तव वही स्मार्ट वर्क कर रहा है।

समस्या कहाँ पर है?

जी हाँ, यह एकदम सही प्रश्न है। वास्तव में आज बहुत से मार्केटर्स ने गधा मजदूरी को कड़ी मेहनत से जोड़कर प्रस्तुत किया है। गधा मजदूरी का अर्थ है बिना किसी योजना के काम करना। बिना किसी रणनीति के काम करना। क्या आप ऐसा सोच रहे हैं कि बिना किसी रणनीति के काम करना कड़ी मेहनत करना है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। इसका अर्था है दिन-रात कड़ी मेहनत करके अच्छे से अच्छे परिणाम प्राप्त करना।

इसलिए कभी भी स्मार्ट वर्क और कड़ी मेहनत को लेकर भ्रमित न हों। इनका अर्थ एक ही है। हमारी समझ अलग-अलग है नहीं तो एक ही हैं। जी हाँ, गधा मजदूरी मत करिए, क्योंकि वह सिर्फ़ गधे का काम है।

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