1 जुलाई 2017 से ब्लॉगर्स को जीएसटी रिटर्न भरना होगा

अभी तक भारतीय कर प्रणाली में ब्लॉगिंग समुदाय का कोई स्थान नहीं था। लेकिन जीएसटी यानि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST – Goods and Services Tax) में ब्लॉगर्स को इंडियन टैक्स सिस्टम में लाया गया है। कुछ ऐसे नियम बनाए गए हैं जिनके अंतर्गत ब्लॉगर्स को जीएसटी रिटर्न भरना होगा। ऐसा इसलिए है कि बहुत से ब्लॉगर्स गूगल विज्ञापन या फ़्लिपकार्ट और अमेजॉन एफ़िलिएट प्रोग्राम से कमाई करते हैं।

नए जीएसटी में ब्लॉगर्स को जीएसटी रिटर्न भरने के लिए शामिल किया गया है। इस टैक्स सिस्टम में रजिस्टर न करने पर तगड़ी पेनॉल्टी लगती है।

इस लेख को प्रकाशित करके हम ब्लॉगर्स की हेल्प करना चाह रहे हैं। इस लेख में जीएसटी से जुड़े सभी प्रमुख बिंदुओं को शामिल करने का कोशिश की है।

Indian bloggers will pay 18% GST

ब्लॉगिंग क्या है? जीएसटी से पहले ब्लॉगर्स टैक्स कैसे भरते थे?

सरल भाषा में ऑनलाइन कंटेंट लिखना ब्लॉगिंग है। शायद, आज इंटरनेट पर मौजूद सभी कंपनियों ने लोगों तक अपनी बात, प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की जानकारी पहुंचाने के लिए ब्लॉग बनाया हुआ है। जब ब्लॉग का कंटेंट सर्च इंजन में सर्च होता है, तो ब्लॉग पर विज़िटर्स बढ़ते हैं, और ब्लॉग ट्रैफ़िक बढ़ने से ब्लॉग लोकप्रिय हो जाता है। ब्लॉग पर अधिक ट्रैफ़िक हो तो विज्ञापन लगाकर कमाई की जा सकती है।

इंडियन टैक्सेशन लॉ (Indian Taxation Law) में विज्ञापनों से की गई कमाई पर टैक्स देना होता है, इसलिए ब्लॉग से विज्ञापन से कमाई करने वाले टैक्स के दायरे में आ जाते हैं।

लेकिन पुराने सर्विस टैक्स लॉ (Service Tax Law) में यह साफ़ तौर पर कहीं नहीं बताया गया है कि इस तरह के ब्लॉगर्स के लिए सर्विस टैक्स रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है या नहीं है। हममें से अधिकांश ब्लॉगर्स की कमाई विदेशों से आती है। गूगल ऐडसेंस द्वारा भेजा गया पेमेंट भी गूगल इंडिया से न आकर गूगल एशिया पैसेफ़िक सिंगापुर से आता है।

पुराना सर्विस टैक्स सिस्टम जल्द ख़तम हो जाएगा और इसकी जगह 1 जुलाई 2017 से नया गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स लागू हो जाएगा।

ब्लॉगर्स के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन और टैक्स

नया जीएसटी लॉ बहुत स्पष्ट है कि किसे इसके अंतर्गत रजिस्टर होना चाहिए।

सेंट्रल जीएसटी एक्ट (Central GST Act) के हिसाब से, जो व्यक्ति भी राज्य के बाहर या देश के बाहर से आमदनी कर रहा है, उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना होगा और उस पर छूट की सीमा लागू नहीं होगी।

दूसरे शब्दों में राज्य सीमा के अंदर काम करने वाले छोटे डीलर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए ही 20 लाख तक की छूट है। लेकिन विदेश से आमदनी करने वाले लोग जैसे ब्लॉगर्स के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन आवश्यक है और छूट नहीं मिलेगी।

इसके अलावा, जीएसटी के हिसाब से ब्लॉगिंग सर्विस को ऑनलाइन इंफ़ॉरमेशन और डेटाबेस एक्सेस या रिट्रीवल सर्विस के अंदर रखा गया है।

रजिस्ट्रेशन न कराने पर पेनाल्टी

यदि कोई ब्लॉगर जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं करवाता है, तो उस पर दो तरह की पेनाल्टी लग जाएगी।

रजिस्ट्रेशन न करने के लिए – 25,000 रुपये तक
रिटर्न फ़ाइल न करने लिए – 100 रुपये प्रति दिन

ब्लॉगर्स को 20 लाख की छूट नहीं मिलेगी

जैसा मैंने ऊपर बताया है कि जो ब्लॉगर्स अपने राज्य के बाहर या विदेशों से कमा रहे हैं, उनको 20 लाख तक कमाई करने पर मिलने वाली छूट का लाभ नहीं मिलेगा।

क्या ब्लॉगर्स को जीएसटी रिटर्न भरना होगा?

जी हाँ, अब भारत में ब्लॉगर्स को जीएसटी रिटर्न भरना होगा। क्योंकि ब्लॉगर्स अब भारत से कमाते हैं न कि केवल भारत के बाहर से कमाते हैं और इसलिए, यह सर्विस एक्सपोर्ट के रूप में नहीं मानी जाएगी। इस तरह सालाना 20 लाख रुपये से अधिक कमाने वाले सभी ब्लॉगर्स को जीएसटी रिटर्न भरना अनिवार्य हो जाएगा। पर अगर आप डॉलर में कमा रहे हैं तो 1 डॉलर कमाने पर भी जीएसटी रिटर्न भरना होगा।

इसके अलावा, अगर आप कुछ भी बाहर से कमाते हैं तो आपको यह वेरीफ़ाई कराना होगा कि पेमेंट एक्स्पोर्ट सर्विस है या नहीं है।

कब ब्लॉग से होने वाली आमदनी को एक्सपोर्ट सर्विस माना जाएगा?

– ब्लॉगर भारत में रहकर ब्लॉगिंग करता हो।
– सेवा पाने वाला भारत से बाहर रहता हो। अगर आप गूगल इंडिया से पेमेंट प्राप्त करते हैं तो इसे एक्पोर्ट सर्विस नहीं माना जाएगा। इसलिए आपको जीएसटी देना होगा।
– आप जिस जगह अपनी सर्विस दे रहे हैं, वह भारत से बाहर हो। सर्विस देने की जगह के बारे में विस्तार से आगे दिया गया है।
– सर्विस देने वाले ब्लॉगर को जो पेमेंट मिल रहा है, वह फ़ॉरेन एक्सचेंज के बाद मिलता हो।

अगर आप पर यह बातें लागू होती हैं तो ब्लॉगिंग इनकम एक्सपोर्ट सर्विस के रूप में मानी जाएगी और अपको 18% जीएसटी नहीं देना होगा।

सर्विस देने की जगह भारत या भारत से बाहर कब

जिसे ब्लॉगर अपनी सेवा दे रहा है, उसे भारत में तब माना जाएगा अगर नीचे दी गई कम से कम दो शर्तें पूरी होती हों।

1. इंटरनेट से सेवा पाने वाले व्यक्ति या कम्पनी के पते पर टैक्स के नियम लगते हों।

2. क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड या स्टोर वैल्यू कार्ड या चार्ज कार्ड या स्मार्ट कार्ड या किसी दूसरा कार्ड जिससे ब्लॉगर की सेवा लेने वाला अपना पेमेंट करता है, वह जिस पते पर जारी किया गया है उस पते पर टैक्स के नियम लागू होते हों।

इसके अलावा सेवा प्राप्त करने वाले का / की…

3. बिलिंग एड्रेस पर टैक्स के नियम लागू होते हों।

4. डिवाइस का इंटरनेट प्रोटोकॉल टैक्सेबल क्षेत्र में आती हो।

5. पेमेंट के लिए प्रयोग किया गया बैंक अकाउंट टैक्सेबल क्षेत्र में आता हो।

6. सब्स्क्राइबर आइडेंटिटी मोड्यूल कार्ड का कंट्री कोड टैक्सेबल क्षेत्र का हो।

7. फ़िक्स्ड लैंडलाइन लोकेशन टैक्सेबल क्षेत्र में आती हो।

सरल शब्दों, यदि ऊपर बताई कोई भी दो कंडीशंस एक साथ लग जाएं तो ब्लॉगिंग को सर्विस के एक्स्पोर्ट के रूप में नहीं माना जायेगा। अत: जीएसटी से छूट नहीं मिल पाएगी।

18% gst on Indian bloggers

ब्लॉगर्स के लिए जीएसटी टैक्स कितना है?

20 लाख से ऊपर की आमदनी पर ब्लॉगर्स को 18% जीएसटी टैक्स देना होगा। ऐडसेंस इनकम और विदेशी एफ़िलिएट मार्केटिंग करने वालों को 20 लाख से कम कमाने पर भी जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराकर तिमाही रिटर्न भरना होगा।

ऐडसेंस इनकम पर जीएसटी कब देना होगा?

कुछ ज़रूरी बातें हैं वो अगर आप पर लागू हुई तो ऐडसेंस इनकम को एक्सपोर्ट ऑफ़ सर्विसेज के अंदर नहीं माना जाएगा। इसके लिए अगली पोस्ट को ध्यान से पढ़िए – कब ऐडसेंस इनकम पर आपको 18% जीएसटी देना ही होगा

जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए ब्लॉगर्स को किन डाक्यूमेंट की ज़रूरत पड़ेगी?

1. ब्लॉगर की फोटो

– प्रोपराइटरशिप होने पर प्रोपराइटर की फोटो
– फर्म / एलएलपी होने पर मैनेजिंग पार्टनर/डेजिगनेटेड पार्टनर की फोटो
– कम्पनी होने पर मैनेजिंग डायरेक्टर/ व्होल टाइम डायरेक्टर की फोटो

2. रजिस्ट्रेशन का प्रमाण पत्र

– पार्टनरशिप फ़र्म होने पर पार्टनरशिप डीड
– एलएलपी और कम्पनी के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट
– प्रोपराइटरशिप होने पर डाक्यूमेंट की आवश्यकता नहीं है

3. बिजनेस के मुख्य पते का प्रमाण पत्र

– अगर आपकी प्रापर्टी है तो बिजली का बिल, टैक्स रसीद या प्रापर्टी टैक्स रसीद या रजिस्ट्री डाक्यूमेंट
– अगर किराये पर प्रापर्टी है तो एग्रीमेंट या लीज़ एग्रीमेंट की कॉपी के साथ उसके ओनर का नाम का बिजली का बिल
– यदि आप न तो मालिक हैं और न रेंट पर हैं तो बिजली के बिल के साथ एनओसी की कॉपी

4. अन्य काग़ज़ात

– बैंक स्टेटमेंट या बैंक पासबुक की स्कैंड कॉपी; कैंसल्ड चेक जिस पर नाम, बैंक अकाउंट नम्बर, एमआइसीआर, आइएफ़एससी और ब्रांच डिटेल व कोड
– आथराइजेशन फॉर्म

जीएसटी रजिस्ट्रेशन के बाद कम्पाइलेंस

जीएसटी रजिस्ट्रेशन करने के बाद ब्लॉगर्स को ये काम नियमित रूप से हर तीन महीन पर करने होंगे।

– आउटवर्ड रिटर्न (सेल्स रिटर्न) फालोइंग महीने की 10 तारीख तक फ़ाइल करना होगा
– इनवर्ड रिटर्न (पर्चेज रिटर्न) फालोइंग महीने की 15 तारीख तक फ़ाइल करना होगा
– कनसोलिडेटेड रिर्टन फालोइंग महीने की 20 तारीख तक भरना होगा
– सभी ज़रूरी टैक्स फालोइंग महीने की 20 तारीख तक भरने होंगे
– सरकारी पोर्टल पर हर एक इनवाइस (रसीद) अपलोड करनी होगी

क्या ब्लॉगर्स को कमोज़ीशन स्कीम का लाभ मिलेगा?

अब सलाना 1.5 करोड़ तक आमदनी करने वाले छोटे ट्रेडर्स और डीलर्स को कमोज़िशन स्कीम का लाभ मिलता है। जिसके अनुसार उनको हर महीने की जगह क्वाटरली ऊपर बताए काम करने होते हैं। इसके अलावा कुल रेवेन्यू का 18% की जगह 2% ही टैक्स देना होता है।

चूँकि ब्लॉगर्स की आमदनी अधिकतर इंटरस्टेट सर्विस नेचर (दो या अधिक राज्यों के बीच) की होती है, इसलिए कमोज़ीशन स्कीम का लाभ भारतीय ब्लॉगर्स पर लागू नहीं हो पाएगा, यानि तिमाही जीएसटी रिटर्न भरना होगा।

अधिक जानकारी के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

निष्कर्ष

मैंने कोशिश करके ब्लॉगर्स के जीएसटी से जुड़े हर ज़रूरी पहलू को कवर करने की कोशिश की है। इसके बावजूद जीएसटी बहुत कॉम्लेक्स है इसलिए इस लेख को पढ़ने के बाद भी इसके बारे में अपने सीए से समझें। अगर जीएसटी के बारे में आपके मन प्रश्न है तो कमेंट करके हमसे पूछ लीजिए।