ऑफ़िस में प्रभावशाली कम्यूनिकेशन करने के टिप्स

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प्रभावशाली कम्यूनिकेशन कार्यस्थल पर आपसी सम्बंधों को मजबूत बनाता है। कोई भी ऑर्गनाइज़ेशन चाहे वह कॉमर्शियल हो या नॉन-कॉमर्शियल बिना प्रभावशाली कम्यूनिकेशन पैटर्न के चल नहीं सकती है। जहाँ बढ़िया कम्यूनिकेशन पूरे चैनेल को बाँधकर रखते हैं वहीं अप्रभावशाली कम्यूनिकेशन भ्रम और अराजकता पैदा करते हैं।

प्रभावशाली कम्यूनिकेशन के तरीके

कार्यस्थल पर प्रभावशाली कम्यूनिकेशन के टिप्स

1. स्थिति को भाँपना

कभी कभी भावनाओं में बहकर हम जल्दबाजी में फ़ैसले करने लगते हैं। बिना स्थिति को भाँपे कोई भी फ़ैसला करना कर्मचारियों के साथ कम्यूनिकेशन बिगाड़ सकता है। इसलिए स्थिति को भाँप कर फ़ैसला करने से कर्मचारियों का ऑर्गनाइज़ेशन में विश्वास बना रहता है।

2. इमोशनल न होना

प्रभावशाली कम्यूनिकेशन के लिए प्रैक्टिकल होना ज़रूरी है। जब कभी संकट आए, आपको अपने फ़ैसले इमोशनल होकर नहीं प्रैक्टिकल होकर लेने चाहिए। किसी को नापसंद करने से ज़्यादा ज़रूरी होता है, उसके स्किल का फ़ायदा उठाना। इसलिए सही फ़ैसले करने के लिए प्रैक्टिकल बनिए।

3. पारदर्शिता रखना

कर्मचारियों का विश्वास जीतने के लिए सदैव उनके साथ पारदर्शिता बरतें। जब आप उनको सूचित और अपडेट रखते हैं तो उन्हें ऑर्गनाइज़ेशन में अपनापन महसूस होता है। पारदर्शिता लाने से कर्मचारी ऑर्गनाइज़ेशन से लम्बे समय तक जुड़े रहते हैं। संकट के समय यही पारदर्शिता ऑर्गनाज़ेशन के लिए सुरक्षा ढाल का काम करती है।

4. सीधे हर बात की जानकारी देना

ऑर्गनाइज़ेशन में जिसे जो काम करना है उसे सीधे ही उसकी जानकारी दीजिए। इसके लिए किसी को भी बीच में नहीं लाना चाहिए। शब्द जब किसी और के ज़रिए होकर पहुँचते हैं तो उनके अर्थ बदलने की सम्भावना रहती है। इसलिए आपको जिससे भी संवाद करना हो सीधे ही करें, बीच में किसी को न लाएँ।

5. आमने सामने बात करना

कभी कभार, मैनेजर को अपने नीचे काम करने वालों के साथ आमने सामने भी बात करनी चाहिए। उन्हें अपनी बात कहने का पूरा मौक़ा देना चाहिए, उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए और उनके सुझाव लेने चाहिए। ऐसा करने से उनमें ऑर्गनाइज़ेशन के साथ काम करने आत्मविश्वास आता है।

6. आपसी मसले भूलना

जब ऑर्गनाइज़ेशन की बात हो तब आपको अपने आपसी मसले भुला देने चाहिए। प्रभावशाली कम्यूनिकेशन के लिए ज़रूरी है कि आप कार्यस्थल पर अपने सभी आपस के झगड़ों को भूल जाएँ।

7. सकारात्मक दण्ड देना

जिस तरह आप अपने कर्मचारियों को सभी के बीच प्रशंसा देते हैं, उसी प्रकार कार्यस्थल पर उनकी बुराइयाँ बताने से बचना चाहिए। एक मैनेजर के रूप में आपको अपने कर्मचारियों का मार्गदर्शन करना चाहिए और उन्हें उनकी ग़लतियाँ बिना अपमानजनक शब्द इस्तेमाल किए बतानी चाहिए। उन्हें उनकी ग़लतियाँ समझने और मानने का पूरा अवसर देना चाहिए। इसलिए उन्हें सकारात्मक दण्ड दिए जा सकते हैं, जिससे आपकी ऑर्गनाइज़ेशन की प्रोडक्टिविटी न बिगड़े।