ब्लॉग पर सम्पर्क फ़ार्म बनाने में होने वाली 5 प्रमुख गलतियाँ

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सम्पर्क फ़ार्म का प्रयोग करके आप जान सकते हैं कि आपके पाठक क्या चाहते हैं। इसका प्रयोग इसलिए किया जाता है ताकि ब्लॉग सम्बंधित किसी भी जानकारी के लिए पाठक आपसे सम्पर्क कर सके। इसका प्रयोग अतिथि लेखों, प्रेस विज्ञापतियों और भी इसी प्रकार की सूचनाओं आदि को प्राप्त करने में होता है। इसलिए सम्पर्क फ़ार्म एक बहुत उपयोगी सहयोगी की भाँति होता है।

वर्डप्रेस ब्लॉग के लिए बहुत से प्लगिंस काम में आते हैं। जिनसे में पाँच प्रमुख नीचे दिये जा रहे हैं:

1. कॉन्टैक्ट फ़ार्म 7 (Contact Form 7)
2. फ़ास्ट सिक्योर फ़ार्म (Fast Secure Form)
3. कस्टम कॉन्टैक्ट फ़ार्म्स (Custom Contact Form)
4. विज़ुअल फ़ार्म बिल्डर (Visual Form Builder)
5. कॉन्टैक्ट मी (Contact Me)

Blog Contact Form

इन वर्डप्रेस प्लगिंस का प्रयोग सेल्फ़होस्टेड वर्डप्रेस के साथ ही किया जा सकता है किंतु इसके अतिरिक्त भी कई तृतीय पार्टी सेवाएँ हैं जो कॉन्टैक्ट फ़ार्म उपलब्ध करवाती हैं। जिनका प्रयोग आप किसी भी ब्लॉगिंग प्लेटफ़ार्म के साथ जैसे वर्डप्रेस, ब्लॉगर और टम्बलर के साथ कर सकते हैं। ये पाँच प्रमुख सेवाएँ नीचे दी जा रही हैं।

1. वुफ़ू (Wufoo)
2. 123 कॉन्टैक्ट फ़ार्म (123ContactForm)
3. कॉन्टैक्टर (Kontactr)
4. ईमेल मी फ़ार्म (EmailMeForm)
5. रिस्पॉन्सो-मैटिक (Response-o-matic)

5 कॉन्टैक्ट फ़ार्म ग़लतियाँ

हम नीचे उन पाँच प्रमुख कॉन्टैक्ट फ़ार्म ग़लतियों की चर्चा कर रहे हैं जिन्हें हर हाल में टालना चाहिए।

अत्यधिक या अनावश्यक जानकारियाँ माँगना

अपने पाठकों से सदैव उतनी ही जानकारी माँगनी चाहिए जितनी की आवश्यकता हो। यह इस पर निर्भर करता है कि वे आपसे क्या जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं।

यदि पाठक आपके ब्लॉग के बारे में जानने को इच्छुक है तो उसके नाम और ईमेल अतिरिक्त किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं होती है।

यदि पाठक किसी विशिष्ट विषय पर जानकारी ले रहा है तो हमें उसे विषय का विकल्प उपलब्ध करवाना चाहिए।

पाठकों से अनावाश्यक जानकारियाँ नहीं माँगनी चाहिए। इससे वे चिढ़ जायेंगे और कॉन्टैक्ट फ़ार्म का प्रयोग किये बिना ही ब्लॉग से लौट जायेंगे। इस प्रकार संचार सिर्फ़ एक तरफ़ा हो जायेगा या वे आपकी पोस्ट पर कमेंट करके जानकारी लेने का प्रयास करेंगे। यदि वह कमेंट पोस्ट के अतिरिक्त किसी अन्य विषय पर हुआ तो आपको उस कमेंट को हटाने की आवश्यकता होगी।

बहुत छोटे-छोटे प्रश्न करना

आपसे जो जानकारियाँ प्राप्त कर रहा है आपको उसके बारे में सारी जानकारी होनी चाहिए। इसलिए उतने विकल्पों का अवश्य प्रयोग कीजिए जिससे कि सम्पर्क करने वाले पाठक के बारे में सारी जानकारी आपको उपलब्ध हो जाये। ब्लॉग सम्बंधित जानकारियों या किसी विशेष टिप्पणी के लिए पाठक से मात्र उसका नाम और ईमेल पता माँगना ही उचित माना गया है।

भ्रमित करने वाले शीर्षक प्रयोग करना

बहुत से ब्लॉगर अपने पाठकों को प्रभावित करने के लिए नये प्रयोगों के तहत सम्पर्क फ़ार्म में अनोखे शीर्षक डालने का प्रयास करते हैं। जिससे सामान्य पाठक आपकी बात का अर्थ स्पष्ट नहीं समझ पाते हैं और भ्रमित होकर सम्पर्क फ़ार्म का प्रयोग करने में अक्षम रहते हैं। जिसके कारण आपका उनसे सम्पर्क नहीं हो पाता है। इसलिए सम्पर्क फ़ार्म के शीर्षक सदैव ही सरल और स्पष्ट होने चाहिए।

उत्तर देने का समय निर्धारित न करना

जब आपसे सम्पर्क करने वाले पाठकों को यह पता नहीं होता है कि उन्हें अपने प्रश्न का उत्तर कब मिलेगा तो वे आपको बार सम्पर्क फ़ार्म से वही जानकारियाँ बार-बार माँगते रहते हैं। इसलिए पाठकों यह बताइए कि आप कितने दिनों में किसी प्रश्न का उत्तर देने में सक्षम हैं और उन्हें स्पष्ट जानकारी दीजिए आपके पास रोज़ बहुत से प्रश्न आते हैं इसलिए उनके प्रश्न का उत्तर उन्हें थोड़े समय के बाद ही मिलेगा। इससे आपको और साथ ही पाठक को भी सुविधा रहती है।

लम्बी-लम्बी शर्तें रखना

बहुत से ब्लॉगर सम्पर्क फ़ार्म में भी शर्तों का प्रयोग करते हैं यह कोई ग़लत बात नहीं है लेकिन सम्पर्क फ़ार्म की शर्तें बहुत लम्बी नहीं होनी चाहिए। यह शर्तें बिल्कुल संक्षिप्त और स्पष्ट होनी चाहिए। इसमें सिर्फ़ उन्हीं बिंदुओं को शामिल कीजिए जिन्हें आप सम्पर्क करने वाले को मनवाना चाहते हैं क्योंकि आज कल शर्तों में लम्बी कहानियाँ कोई नहीं पढ़ना चाहता है।

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