एडसेंस से कमाई बढ़ाने के लिए ऑप्टिमाइज़ेशन टिप्स

ऐडसेंस अभी तक का सबसे बढ़िया ऑनलाइन कमाई का ज़रिया है जो आपको अधिक से अधिक कमाने का अवसर देता है और साथ ही यह तकनीकि रूप से भी बहुत अच्छा है, इससे बहुत बड़े बड़े एडवर्टाइज़र्स जुड़े हुए हैं, और आप इसे फ्री में ज्वाइन कर सकते हैं। यही कारण है कि एडसेंस से कमाई करने के लिए बहुत ही अधिक संख्या में पब्लिशर्स ने साइनअप किया हुआ है।

खेद की बात है कि बहुत कम पब्लिशर्स ही एडसेंस के विज्ञापनों को ऑप्टिमाइज़ करते हैं, जैसे ही उनको ऐडसेंस अकाउंट का एप्रूवल मिलता है वो अपनी मर्ज़ी से साइट पर कहीं भी एक या दो यूनिट लगा लेते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनको ऐडसेंस यूनिट लगाने के बारे में सही जानकारी नहीं पता होती है। जिससे वे अच्छी कमाई का अवसर खो देते हैं। आइए आज हम ऐडसेंस ऑप्टिमाइज़ेशन के बारे में आपको बताते हैं।

एडसेंस से कमाई के लिए ऐड ऑप्टिमाइज़ करें

एडसेंस से कमाई बढ़ाने का रास्ता

विज्ञापन ऑप्टिमाइज़ करना क्या है

अपने ब्लॉग रीडर्स का यूज़र्स एक्सपीरियंस घटाये बिना अपनी एड यूनिट से अधिक से अधिक कमाने का रास्ता निकालना ही विज्ञापन ऑप्टिमाइज़ करना कहा जाता है।

विज्ञापनों को ऑप्टिमाइज़ क्यों करें

अपनी वेबसाइट पर विज्ञापनों द्वारा कमाई बढ़ाने के लिए साइट को ऑप्टिमाइज़ करना चाहिए। इसमें ऐड को रीडर्स के सामने इस प्रकार अधिक से अधिक लाया जाता है कि उन्हें साइट और भी अधिक यूज़फ़ुल लगने लगे।

1. अलग अलग ऐड स्टाइल प्रयोग करके देखें

एडसेंस से कमाई बढ़ाना चाहते हैं तो अलग अलग ऐड स्टाइल प्रयोग करके आप बैनर ब्लाइंडनेस की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। जिस वजह से रीडर्स उसे अनदेखा कर देते हैं। ऐड स्टाइल के तीन बातें काम आती हैं –

  1. वेब पेज के साथ विज्ञापन का बैंकग्राउंड और बार्डर कलर मैच करायें।
  2. ऐड को कॉम्प्लिमेंट करने के लिए आपको अपनी साइट में प्रयोग किए गए रंगों को यूज़ करना चाहिए।
  3. गहरे रंग के पेजों पर आपको कॉन्ट्रास्ट रंगों का प्रयोग करना चाहिए

2. अलग अलग आकार के विज्ञापन प्रयोग करके देखें

हम आपको विभिन्न आकार और रंग के विज्ञापन साइट पर अलग अलग जगह लगाकर देखने के लिए कहते हैं ताकि आप अपनी साइट पर बेस्ट ऐड सेटअप कर सकें।

सामान्य रूप से देखा गया है कि चौड़े विज्ञापन लम्बे विज्ञापनों की तुलना में अधिक बेहतर साबित होते हैं, ऐसा इसलिए होता है कि रीडर्स पेज स्क्राल किए बिना ही विज्ञापन में दी गई जानकारी पढ़ लेते हैं।

गूगल ऐडसेंस रिसर्च के हिसाब से 336×280, 300×250, 728×90, 300×600 और 320×100 आकार के विज्ञापनों पर अधिक क्लिक किए जाते हैं और उनसे कमाई बढ़ जाती है।

3. अलग अलग जगह विज्ञापन लगाकर देखें

विज्ञापन की स्टाइल और उसके आकार के साथ साथ वह पेज पर कहाँ लगाया गया है इससे भी बहुत अंतर पड़ता है।

विज्ञापन कहाँ लगाना है इसको जानने के लिए आपको पता करना होगा कि पेज के किस भाग पर रीडर्स अधिक समय बिता रहे हैं। इस बात का पता करने के लिए आपको ऐडसेंस और एनालिटिक्स अकाउंट्स को एक साथ जोड़ना होगा।

दो वेबसाइटों पर एक जैसे ऐड प्लेसमेंट एक जैसी कमाई देंगे इसकी कोई गारंटी नहीं होती है। साथ ही होमपेज और पोस्ट पेज पर विज्ञापनों का एक सा सेटअप भी एडसेंस से कमाई की गारंटी नहीं है।

आप साइट के दो भाग होते हैं –

  1. एबव द फ़ोल्ड यानि वह भाग जिसे रीडर बिना स्क्राल किए देखता है
  2. बिलो द फ़ोल्ड यानि जिसे रीडर स्क्राल करने के बाद देखता है

आप इन दोनों पर विज्ञापन लगा सकते हैं । इसके अलावा हेडर, साइडबार, पोस्ट के अंदर और पोस्ट के नीचे विज्ञापन लगाये जा सकते है। किस भाग से आपको कमाई हो रही है इसके लिए आपको इन सभी जगहों पर बारी बारी विज्ञापन लगाकर देखना चाहिए। उनकी परफ़ार्मेंस जांचनी चाहिए।

अधिक कमाने का रास्ता

4. एक से अधिक ऐड यूनिट का प्रयोग कीजिए

अगर संभव हो तो आपको एक से अधिक ऐड यूनिट प्रयोग करनी चाहिए जिससे क्लिक की संभावना बढ़ जाए। गूगल ऐडसेंस पॉलिसी के अनुसार आप 3 स्टैंडर्ड ऐड यूनिट, 3 तीन लिंक यूनिट और दो ऐडसेंस सर्च बॉक्स एक पेज पर प्रयोग कर सकते हैं।

लम्बे वेब पेजों पर इस तरह से अधिक से अधिक विज्ञापन दिखाकर एडसेंस से कमाई के रास्ते खोले जा सकते हैं।

5. छोटी जगहों पर लिंक यूनिट लगायें

लिंक यूनिट को छोटी जगहों पर लगाना चाहिए क्योंकि इसमें लिंक लिस्ट होती है। इन लिंक्स पर क्लिक करने रीडर एक सर्च पेज पर जाते हैं जहाँ उनको सम्बंधित विज्ञापन दिखाये जाते हैं। लिंक यूनिट भी आपका ऐड रेवेन्यू बढ़ाने में बहुत मददगार साबित होती हैं।

6. डिसप्ले और टेक्स दोनों तरह के ऐड दिखायें

ऐडसेंस में ऐड यूनिट बनाते समय आप देख सकते हैं कि वहाँ ऐड यूनिट टाइप के तीन विकल्प मौजूद होते हैं –

  1. ओनली टेक्स्ट ऐड
  2. ओनली डिसप्ले ऐड
  3. बोथ टेक्स्ट एंड डिसप्ले ऐड

गूगल ऐड रेवेन्यू बढ़ाने के लिए हमेशा ही आपको तीसरे प्रकार की ऐड यूनिट लगाने का अनुग्रह करता है ताकि आपको ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा मिल सके। जब ऐड स्पेस की बिडिंग होती है तो उसमें टेक्स्ट और डिसप्ले दोनों तरह के ऐड शामिल होते हैं और उनमें से जो ज़्यादा दाम देता है वही आपकी साइट पर दिखाया जाता है।

अगर आप सिर्फ़ टेक्स्ट या सिर्फ़ डिसप्ले ऐड यूनिट लगाते हैं तो आप आधे से ज़्यादा एडवर्टाइज़र्स को बिड लगाने का मौक़ा नहीं देते हैं। इससे हो सकता है कि आपका रेवेन्यू घट जाए और आपको एडसेंस से कमाई का अवसर न मिले।

7. ऐड फ़िल्टर का अधिक प्रयोग न करें

ऐडसेंस में आप ऐड यूआरएल और कैटगेरी के हिसाब से कुछ तरह के विज्ञापन बंद कर सकते हैं जो आपकी साइट से सम्बंधित न हों। ऐसा करने से आप अपनी पसंद और साइट के विषय के हिसाब से विज्ञापन दिखा सकते हैं।

ऐसा करना काफ़ी हद तक फ़ायदेमंद होता है, लेकिन अगर आप अधिक ऐड फ़िल्टर का प्रयोग करेंगे तो आपके पास बिड लगाने वाले कम एडवर्टाइज़र्स रह जायेंगे।

8. कंटेंट के लिए पेजीनेशन प्रयोग करें

जैसा कि गूगल अपने आप विज्ञापनों को रिफ़्रेश नहीं करता है तो एक बार पेज लोड होने के बाद वही विज्ञापन पेज खुले रहने तक दिखता रहता है।

अगर आपकी पोस्टें बहुत लम्बी होती हैं तो आपको पोस्ट को छोटे छोटे अंशों में तोड़कर पेजीनेशन का प्रयोग करना चाहिए, जिससे यूज़र को अगला भाग पढ़ने के लिए “अगला पेज” या “पेज संख्या” पर क्लिक करके आगे जाना पड़े।

वर्डप्रेस की बहुत सी थीम, प्लगिंन इस तरह का पेजीनेशन आपको बनाने देते हैं। अब तो ब्लॉगर के लिए भी बहुत सी थीम ऐसी हैं जिनमें यह फ़ीचर आपको मिल जायेगा।

इस तरह से रीडर लम्बा कंटेंट देखकर विचलित नहीं होगा और दूसरा कि आपकी ऐड यूनिट रिफ़्रेश हो जाएगी जिससे नया विज्ञापन दिखेगा और यूज़र उसपर भी क्लिक कर सकता है।

अधिक कमाने के लिए पेजीनेशन

 

9. ऐड यूनिट की A/B टेस्टिंग करें

तरह तरह की ऐड स्टाइल, साइज़ और लोकेशन के साथ भी यह पता करना मुश्किल होता है कि एडसेंस से कमाई के लिए कौन सा कॉम्बिनेशन आपकी साइट पर काम करेगा। A/B टेस्टिंग वह तरीक़ा है जिससे आप अंदाज़ा लगाने की बजाय आप वास्तविक डेटा का प्रयोग करके सही निर्णय ले सकते हैं।

ऐडसेंस में आप यह टेस्टिंग एक्सपेरिमेंट टैब के अंतर्गत सेट कर सकते हैं। जहाँ आपको विभिन्न प्रकार के सम्बंधित विकल्प मिल जायेंगे।

10. ऑटोमैटिक ऐड टेस्टिंग प्रयोग करें

A/B टेस्टिंग के द्वारा एक एक करके टेस्ट रन करना बहुत मुश्किल काम हो सकता है। इसकी जगह आपको ऑटोमैटिक ऐड टेस्टिंग प्रयोग करें आपका काम आसान बन सकता है। ऐडपुशअप ऐसा ही एक टूल है जो इस काम में आपकी पूरी मदद करता है। जो थोड़े ही समय में आपके ब्लॉग के सभी पेजों के लिए सही ऐड स्टाइल, साइज़ और लोकेशन का बेस्ट कॉम्बिनेशन ऑफ़र करता है जिससे आपकी कमाई 68% तक बढ़ जाती है।

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